
पुराने व असाध्य रोगों का जड़ से पक्का आयुर्वेदिक उपचार
संस्थान में 100% शुद्ध शास्त्रीय पुटपाक योग व जड़ी-बूटियों द्वारा रोग के मूल कारण (वात-पित्त-कफ) का स्थायी निवारण किया जाता है। बिना किसी साइड-इफेक्ट के लाखों मरीजों को मिला नया जीवन।
प्रमुख क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्र (Our Centers)
प्रत्येक केंद्र पर अनुभवी आयुर्वेदाचार्य द्वारा प्रामाणिक नाड़ी परीक्षा एवं 100% शुद्ध शास्त्रीय औषधियां उपलब्ध हैं।
निकटतम केंद्र की जानकारी या ऑनलाइन परामर्श के लिए हेल्पलाइन:
केंद्रीय नंबर: +91 9199157555 / 9009999359
रोग की जड़ तक पहुंचने की चतुष्पाद चिकित्सा पद्धति
आयुर्वेद केवल लक्षणों को नहीं दबाता, अपितु त्रिदोषों (वात, पित्त, कफ) का संतुलन स्थापित कर असाध्य रोगों को समूल नष्ट करता है।
Root Cause Analysis
हाथ की नाड़ी की तरंगों से शरीर के आंतरिक दोषों, आम-विष एवं गुप्त व्याधियों का अचूक सटीक निदान।
Classical Medicine
कच्ची जड़ी-बूटियों एवं प्राचीन ग्रंथाधारित शुद्ध भस्मों से संस्थान की अपनी रसशाला में निर्मित रसायन।
Cellular Purification
स्नेहन, स्वेदन, जानु बस्ति व कटि बस्ति द्वारा जोड़ों व मेरुदंड में जमे विषैले तत्वों का संपूर्ण निष्कासन।
Constitutional Diet
प्रकृति के अनुसार व्यक्तिगत खान-पान तालिका, ताकि रोग कभी दोबारा लौटकर न आए।
प्रामाणिक शास्त्रीय आयुर्वेदिक उत्पाद एवं औषधियां
चरक एवं सुश्रुत संहिता के अनुभूत योग, 100% शुद्ध हिमालयन जड़ी-बूटियों एवं स्वर्ण-रजत भस्मों से निर्मित।
विशेष आयुर्वेदिक योग परामर्श एवं होम डिलीवरी (All India Express)
यदि आपको किसी जटिल रोग हेतु व्यक्तिगत औषधि मिश्रण या भस्म रसायन चाहिए, तो हमारे वरिष्ठ वैद्यों से सीधे संपर्क करें।
हठकारी एवं जटिल रोगों का सफल आयुर्वेदिक उपचार
ऐसे रोग जहाँ एलोपैथी में केवल आजीवन पेनकिलर या सर्जरी का विकल्प बचता है, वहाँ आयुर्वेद स्थायी स्वास्थ्य प्रदान करता है।
संधिवात / आमवात (गठिया व जोड़ों का दर्द)
घुटने के दर्द व घिसाव में सर्जरी कराने से पूर्व संस्थान की शास्त्रीय जानु बस्ति, पत्र पिण्ड स्वेद तथा संधिमुक्त तैल एवं वटी का उपचार लें। यह जोड़ों से आम-विष को निकालकर प्राकृतिक सायनोवियल द्रव को बढ़ाता है।
मधुमेह (डायबिटीज)
रक्त शर्करा की वृद्धि, अत्यधिक प्यास, बार-बार पेशाब आना, थकान और नसों में कमजोरी।
सोरायसिस एवं त्वचा विकार
त्वचा पर लाल चकत्ते, चांदी जैसी सफेद पपड़ी, असहनीय खुजली एवं त्वचा का फटना।
ग्रहणी, उदर रोग एवं अम्लपित्त
पेट में जलन, गैस, कब्ज, अपच, आईबीएस (ग्रहणी) और खट्टी डकारें।
संस्थान की पवित्र रसशाला एवं पंचकर्म दीर्घा
गया जी मुख्य धाम में स्थित प्राचीन रसशाला, पंचकर्म कक्ष एवं औषधि निर्माण प्रक्रिया की झलक।
शास्त्रीय पंचकर्म एवं शिरोधारा कक्ष
शुद्ध नीम की काष्ठ द्रोणी, कांसा पात्र एवं ध्यानमय वातावरण
पारंपरिक जड़ी-बूटी निर्माण एवं रसशाला
शुद्ध पत्थर के खरल में जड़ी-बूटियों का शास्त्रीय मर्दन
पवित्र गया जी चिकित्सा परिसर
तुलसी, नीम, अशोक से युक्त औषधीय वाटिका एवं फल्गु की शीतल बयार
नाड़ी परीक्षा एवं त्रिदोष परीक्षण कक्ष
गहन नाड़ी स्पंदन एवं प्रकृति निर्धारण हेतु शांत वातावरण
कटि एवं जानु बस्ति मर्म चिकित्सा कक्ष
घुटने और रीढ़ की हड्डियों में उष्ण औषधीय तेल का भराव
द्रव्यगुण औषधीय वनस्पति वाटिका
150 से अधिक दुर्लभ वनस्पतियों का जैविक संवर्धन
रोगी अनुभव एवं आरोग्य गाथाएं
संस्थान से रोगमुक्त हुए श्रद्धालुओं व मरीजों के प्रामाणिक अनुभव।
“डॉक्टरों ने घुटने बदलवाने की सलाह दी थी। गया जी केंद्र में जानु बस्ति और काढ़े के सेवन से आज मैं बिना लाठी के चल पा रहा हूँ। सनातन आयुर्वेद को नमन!”
“I was advised bilateral knee replacement surgery. Within 45 days of Janu Basti and Rasayana decoctions at the Gaya Ji Sansthan, I can now walk without a stick and climb stairs comfortably. Real blessings of Dhanvantari!”
“6 साल से सोरायसिस से परेशान थी। नाड़ी परीक्षा के बाद तकरधारा और रक्त शोधक औषधियों से मेरी त्वचा बिल्कुल साफ हो गई है।”
“Struggled with steroid creams for 6 years. Vaidya ji identified high Pitta and Ama during pulse check. The Takradhara and herbal blood purifiers completely cleared my skin in 3 months.”
“दाहिने पैर में भयंकर साइटिका का दर्द था। कटि बस्ति और औषधीय तेल से 10 दिनों में असाधारण आराम मिला। ऑपरेशन की नौबत नहीं आई।”
“Excruciating radiating pain in my right leg made sitting impossible. The Kati Basti and specialized herbal oils provided 80% relief within just 10 sittings. Highly recommended.”
आज ही अपने स्वास्थ्य के लिए पहला कदम उठाएं
घर बैठे प्रामाणिक शास्त्रीय औषधियां मंगाएं या गया जी मुख्य चिकित्सालय एवं क्षेत्रीय शाखाओं हेतु डिजिटल टोकन प्राप्त करें।


